आर.ई.एफ के द्वारा कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग पुणे (सी.ओ.ई.पी) शिवजी नगर कैंपस पुणे के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को 14 लाख 58 हज़ार 750 रूपए की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। सी.ओ.ई.पी के एप्लाइड साइंस डिपार्टमेंट के सहायक प्रोफेसर डॉ.महेश शिंदीकर ने आर.ई.एफ के पीआरओ जयवंत पवार से चेक प्राप्त किया। डॉ. शिंदीकर ने कहा मै यह देखकर बहुत प्रसन्न हूँ की आर.ई.एफ के द्वारा 20 मेधावी और योग्य छात्रों ने वित्तीय सहायता प्राप्त की ।
हमारे पास ऐसे छात्र है जो बी.टेक और एम.टेक पाठ्यक्रम के लिए नामांकन करते है यह नामांकन 4 वर्षो के लिए है। सी.ओ.ई.पी में हमने पहले वर्ष में एकल खिड़की प्रणाली को अपनाकर योग्य छात्रों की पहचान की। हमने आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की जांच की और उनकी आवश्यकताओ की पहचान की। हमारे पास सी.एस.आर गतिविधियों के तहत कॉर्पोरेट्स है जो हमारे लिए अपना समर्थन प्रदान कर रहे है।हम सौभाग्यशाली है की आर.ई.एफ, एनजीओ ने उनकी सहायता की।
डॉ महेश शिंदीकर ने कहा- “ये छात्र समाज के विभिन्न स्तरों को प्रतिनिधित्व करते है और बहुत ही चुनौतीपूर्ण पृष्टभूमि से आते है।हम इन छात्रों को उनकी कॉलेज फीस ,हॉस्टल फीस के साथ समर्थन करते है और उसके लिए हम आर.ई.एफ की मदद की सराहना करते है।“
इस मदद ने उनके बोझ को कम कर दिया है और उनके वित्तीय मुद्दों का एक बड़ा हिस्सा आर.ई.एफ ने इस छात्रवृत्ति के माध्यम से हल किया है यह इन छात्रों के लिए एक जबरदस्त बढ़ावा है ” । हमें आर.ई.एफ के 20 छात्रों के लिए चौदह लाख,अठावन हजार,सात सौ पचास रूपए की सहायता मिली है और हम भविष्य में और अधिक छात्रों के समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं । डॉ.शिंदीकर ने प्रसन्न दृष्टिकोण से कहा -“हमने आर.ई.एफ में डॉ.कंवर और अधिकारियों के साथ चर्चा शुरू की” अब हम आर.ई.एफ के सदस्यों के इस इशारे से सामान हिस्सेदारी की स्थापना कर चुके हैं।
अभिषेक हिवाले,बी.टेक की पढ़ाई कर रहे हैं। यह संभवत: पहला एन.जी.ओ है जिसने सीधे हमारे साथ भाग लिया है । उन्हें वित्तीय बाधाओं का सामना करना पड़ा क्योंकि उनके पिता अपनी नौकरी से सेवानिवृत्त हो गए थे और उनकी माँ एक गृहिणी है। होनहार छात्र ने और उसके बड़े होने वाले भाई बहनों ने अपने सपनों को धारण करने के लिए सभी बाधाओं से लड़ाई लड़ी। “मैं आर.ई.एफ से मदद की सराहना करता हूँ।यह मेरे लिए बहुत मायने रखता है। मेरा शिक्षा पूरी होने पर आई.ए.एस अधिकारी बनने का सपना है और मुझे ख़ुशी है की आर.ई.एफ की इस समय पर मदद ने मे्रे आत्मविश्वाश को बढ़ावा दिया है” मुस्कुराते हुए अभिषेक ने कहा।
ममता वानखड़े बी.टेक छात्र को भी इसी तरह की समस्याओ का सामना करना पड़ा उसके पिता किसान और माँ गृहणी है।उन्हें भी शिक्षित होने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। 30,000रु की छात्रावास फीस और 9,500रु कॉलेज शुल्क को आर.ई.एफ के हस्तक्षेप द्वारा तुरंत सम्बोधित किया गया था ।मुझे बड़ी राहत महसूस हुई क्योकि मे्रे पिता इसे पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे थे ।खेती उत्पादक नहीं थी और हमे बहुत सारी समस्याओ का सामना करना पड़ा।अब मै अपने माता,पिता के बोझ को हल्का करके प्रसन्न हूँ ।ममता ने वित्तीय सहायता के लिए आभार व्यक्त किया ।
बी.टेक(कंप्यूटर इंजीनियरिंग ) के छात्र संकेत खैरे ने उम्मीदे खो दी थी क्योकि उनके पिता की एकमात्र आय कृषि से थी और प्राकृतिक आपदाओं के कारण उत्पादन डूबा था ।“ मे्रे पिता मेरी फीस के बारे मै चिंतित थे जो 79,350 हज़ार थी और हाल ही मै मैंने अपनी दादी को बिमारी के कारण खो दिया और उनके अस्पताल मै भर्ती होने के कारण हमारे वित्त पर टोल लगा दिया गया । आर.ई.एफ ने मुझे अपनी शिक्षा जारी रखने मे मदद की और मै अपने लक्ष्यों को साकार करने के लिए तत्पर हूँ” । संकेत ने बताया ।
महेश माली,सी.ओ.ई.पी मै (इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्यूनिकेशन) की पढाई कर रहे है बी.टेक के छात्र के पास अपनी समस्याओ के अंश थे।मेरे पिता किसान है और मुझे आगे की पढाई पूरी करने की कोई उम्मीद नहीं थी ।आर.ई.एफ की मदद ने मेरे परिवार को बड़ी राहत दी है आज मुझे एक ऐसे शाखा मै प्रवेश मिला है जिसके बारे मे मैं अपने क्षेत्र मे उत्कृष्ट प्रदर्शन करने का प्रयास करूँगा ।
सनमीत वाघचौरे बी.टेक के छात्र एक चुनौतीपूर्ण पृष्ठ्भूमि से है ,वह अपने पिता की आय पर निर्भर थे। ” मैं आर.ई.एफ का बहुत आभारी हूँ यह छात्रवृत्ति मेरे लिए बहुत मायने रखती है ।आर.ई.एफ द्वारा किया गया कार्य बहुत सराहनीय है और जिसने हमारी मदद की है उसके लिए हार्दिक शुभकामनाए। सनमीत ने कहा मेँ अपनी शिक्षा पूरी होने पर सिविल सेवा के लिए अध्ययन करना चाहता हूँ।“ “कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग पुणे महाराष्ट्र सरकार का एक स्वायत्त संस्थान है और इंजीनियरिंग के अधिकांश उम्मीदवारो द्वारा सबसे अधिक मांग वाला पहला संस्थान है”-डॉ. पी.आर ने सूचित किया ।
जिन छात्रों को सी.ओ.ई.पी मेँ प्रवेश मिलता है,वे महाराष्ट्र के सभी कोनो से है और उनमे से अधिकांश बहुत कम आय वर्ग के है। धमनगांवकर, एसोसिएट डीन(स्टूडेंट अफेयर )सी.ओ.ई.पी ने बताया सी.ओ.ई.पी मेँ ट्यूशन फीस और छात्रावास फीस बहुत कम है लेकिन फिर भी छात्रों को खर्चो को पूरा करना मुश्किल लगता है ।इसके कारण कई बार मेधावी और योग्य छात्र बीच मेँ ही चले जाते है ऐसी स्थिति मेँ जरूरतमंद और मेधावी छात्रों का समर्थन करना आव्यश्यक है।
डॉ. धमनगांवकर ने कहा – “मैं पूरी तरह से आर.ई.एफ का तहे दिल से शुक्रगुजार हूँ जिन्होंने आगे आकर 20 जरूरतमंद (प्रथम वर्ष अंडर ग्रेजुएट) छात्रों का समर्थन किया ।यह समर्थन निश्चित रूप से छात्रों और भविष्य मे मानसिकता को भी बदल देगा और वे बेहतर करेंगे ।“
आर.ई.एफ एनजीओ वाकड पुणे ने 150 वंचित छात्रों की सहायता की है और व्यक्तिगत प्रायोजकों और जागरूक कॉर्पोरेट्स के समर्थन से 2614793 रु की राशि उनके शिक्षा शुल्क के रूप मे दिया है।
आर.ई.एफ के संस्थापक श्री अमरपाल सिंह इन योग्य छात्रों के भविष्य को उच्च शिक्षा के साथ सुरक्षित देखकर प्रसन्न थे।
श्री सिंह,आई.आई.एम बैंगलोर के पूर्व छात्र,समाज को वापस देने का सपना आर.ई.एफ एनजीओ के माध्यम से किया गया जो सभी के लिए शिक्षा के माध्यम से समाज के सामजिक विकास के लिए समर्पित है। वह इस सेवा को सारे देश मे फ़ैलाने की योजना बना रहे है जिससे भारत के वंचित छात्रों को शिक्षा के माध्यम से हमारे देश की अर्थव्यवस्था को वढ़ावा देने के लिए ज्ञान और ज्ञानप्राप्त करने मे मदद मिले। आर.ई.एफ एनजीओ,सी.आई.एन :U85200PN2018PTC176205 के साथ कंपनी अधिनियम,2013 की धारा 8 के तहत पंजीकृत है, जो अपने 12वी कक्षा के पूरा होने पर कमजोर छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
कैप्शन – आर.ई.एफ के पीआरओ जयवंत पवार द्वारा प्रस्तुत किया गया चेक लेते हुए डॉ. महेश शिंदीकर ,बायोलॉजी मे सहायक प्रोफेसर ,एप्लाइड साइंस डिपार्टमेंट,सी.ओ.ई.पी ।
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